शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली, सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रऔद्योगिकि संस्थान, सूरत -गुजरात तथा वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय, सूरत -गुजरात के संयुक्त तत्वावधान में  आयोजित राष्ट्रीय शैक्षिक कार्यशाला (25से 28 दिसंबर 2025) में सहभागिता का अवसर अवध प्रान्त की भारतीय भाषा मंच की प्रान्त संयोजिका के रूप में रहा।

       इस कार्यक्रम का उद्देश्य विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पंच परिवर्तन की संकल्पना (1. स्व का बोध 2. नागरिक कर्त्तव्य बोध 3.पर्यावरण 4. सामाजिक समरसता 5. कुटुंब प्रबोधन ) को साकार रूप देते हुए क्रियान्वयन के लिए प्रेरित करना रहा।न्यास के सभी महत्वपूर्ण विषयों को भारतीयता से जोड़ते हुए, भारतीय ज्ञान परम्परा के आधार को लेते हुए पंचकोशों के प्रति जागरूक करना भी सभी का लक्ष्य होना चाहिए इसके लिए भी प्रेरित किया गया। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र  में न्यास की विकास यात्रा का पुनः उल्लेख करते हुए विषय वस्तु की रुपरेखा को प्रस्तुत किया गया।राष्ट्रीय सचिव, न्यास श्री अतुल कोठारी जी के द्वारा "विकसित भारत विनिमय परिषद" के गठन का उल्लेख करते हुए अनेक विश्वविद्यालयों के पधारे कुलपतियों ने अपने कार्यों व  स्थापित किये गए प्रतिमानों की प्रस्तुति ppt के माध्यम से किया गया। चिंतन-मनन और क्रियान्वयन, उच्च शिक्षा विकास दृष्टि, उच्च शिक्षा में भारतीयता, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा रोजगारपरक, कौशल विकास से सम्बन्धित  कार्ययोजना को भी प्रस्तुत किया गया।

        प्रथम दिवस की संध्या के सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत धन्य धरा गुजरात की समग्र झलक प्रस्तुत करती (जयतु जयतु गुजरातम..) नृत्य संगीत की अद्भुत प्रस्तुति के बाद क्रम से डांग नृत्य (इसमें आदिवासी साथ में पूर्ण सामंजस्य व संतुलन के साथ पारम्परिक वाद्य यन्त्रों की ध्वनि के मध्य मुख से विशेष प्रकार की ध्वनि करते हुए ) में समाहित भारतीयता भावपूर्ण मनमोहक  रही। "नर्मदा अष्टकम" से प्रेरित गीत "नमामि देवि नर्मदे..." नृत्य संगीत, झालावाड़ी नृत्य, गरबा नृत्य (इसमें युगलों के समूह द्वारा आदि शक्ति माँ भवानी  को समर्पित  तालियों, डांडियों के समिश्रण से युक्त नृत्य संगीत ), राष्ट्रीय चेतना नृत्य (वन्दे मातरम..) इन प्रस्तुतियों ने मन को, हृदय को संगीतमय  कर दिया।

      द्वितीय दिवस पंचम सत्र में पंच परिवर्तन की समग्रता से चर्चा -परिचर्चा, वक्ता- श्रोता के मध्य विचारों के आदान -प्रदान, अनुभवों की चर्चा, हुई। प्रस्ताव सभी के समक्ष विचार हेतु रखा गया। समानांतर सत्र में विविध विषयों की विषद चर्चा, राष्ट्रीय संयोजक, क्षेत्र संयोजक, प्रान्त संयोजक, कार्यकर्ताओं की बैठक, परिचय व अपने-अपने कार्यों का प्रस्तुतीकरण किया गया। सार्वजनिक सत्र में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री श्री प्रद्युम्न भाजा जी के कर कमलों से कई संस्थानों के प्रमुखों को "एक राष्ट्र एक नाम :भारत सम्मान" से सम्मानित किया गया।पुस्तक विमोचन के पश्चात् मुक्त चिंतन की अध्यक्षता क्षेत्र संयोजक शोभा ताई जी के द्वारा की गई। दो विश्वविद्यालयों के मध्य समझौता भी हुआ कि वह आपसी सामंजस्य के साथ कार्य करेंगे। 

      तृतीय दिवस में प्रस्ताव सत्र में विचार करके प्रस्ताव ओमकार की ध्वनि के साथ पास किया गया। क्षेत्रीय बैठकों कार्यों की वार्षिक कार्ययोजना को प्रस्तुत किया गया। अनुभव की लिखित प्रति भी प्रस्तुत की गई। समापन सत्र में  पूरी कार्यशाला के मध्य के अनुभवों को साँझा किया गया कुछ संकल्प लिए गए.. कुछ दायित्व वान कार्यकर्ताओं को बड़े दायित्व दिए गए।उद्घाटन सत्र से समापन सत्र तक की वैचारिकता, विचार-विमर्श, प्रोत्साहन, सम्मान, सहभागिता, सामाजिकता व अन्य सभी प्रेरक व सराहनीय रहे। अनुशासन और सौहार्द, स्नेह, आत्मीयता, औरआतिथ्य सत्कार, यातायात व आवास की व्यवस्था, भोजन आदि सराहनीय रहा। 

      कार्यशाला के मध्य प्रस्तुत किये गए सांस्कृतिक कार्यक्रम ने मन मोह लिया अद्भुत प्रस्तुतियाँ, गुजरात की धन्य धरा की झलक, नृत्य और संगीत का अद्भुत संगम.... भाव की नर्मदा उतर आयीं हो जैसे.. गुजरात राज्य संगीत नाटक अकादमी तथा खेल, युवा एवं सांस्कृतिक गतिविधि विभाग, गुजरात को सादर धन्यवाद एवं हार्दिक आभार 🙏

     कार्यक्रम के समापन के बाद हमारे अवध प्रान्त के चरित्र निर्माण और व्यक्तित्व का विकास विषय के प्रान्त संयोजक श्री ज्ञान पाण्डेय सर के सौजन्य से मुझे जीवन में पहला अनुभव सागर दर्शन का मिला। यह मेरे लिए अद्भुत और अविस्मरणीय रहा। पिता तुल्य स्नेह के लिए मैं आभारी हूँ... साथ ही हमारे अवध प्रान्त के प्रान्त संयोजक श्री प्रमिल द्विवेदी सर के विपरीत परिस्थितियों में भी प्रयास से "स्टेचू ऑफ़ यूनिटी " को भी देखने का अवसर बना दिया। यह भी मेरे लिए अद्भुत, भव्य और अविस्मरणीय रहा। पहली बार मैंने यह अनुभव किया कि जैसे मेरे दो अभिभावक मेरे साथ हों  मैं निश्चिन्त थी जैसे मेरे पिता और भाई मेरे साथ हों। मैं आप दोनों की आभारी हूँ इस आत्मीयता के लिए।🙏

मन में कई संकल्प लिए राष्ट्रीय शैक्षिक कार्यशाला–2025 के त्रिदिवसीय सफल एवं अनुकरणीय आयोजन के लिए SVNIT, वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में कार्य करने वाली राष्ट्रीय संचालन समिति एवं सूरत व्यवस्था समिति केसभी समर्पित कार्यकर्ताओं को हृदय से साधुवाद और आभार।आपकी उत्कृष्ट कार्यक्रम योजना, आत्मीयता, अनुशासित व्यवस्था और गरिमापूर्ण अतिथि-सत्कार ने इस आयोजन को भव्य और प्रेरणादायी बना दिया।मैं हृदय से आप सभी के लिए आभार प्रकट करती हूँ धन्यवाद 🙏🙂

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