अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस
निज भाषा उन्नति अहै,सब उन्नति को मूल आज अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर हम सभी आभासी माध्यम से जुड़कर मातृभाषा के प्रति जागरूकता को बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे हैं।"अपनी माटी अपना देश अपनी भाषा अपना वेश"अनीश कुमार गुप्ता जी की यह रचना है। जो हमें अपनी भाषा में अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित करती है।इसी सम्बन्ध में हम देखते हैं कि हमारे डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद जी ने भी कहा है कि "जिस देश को अपनी भाषा और साहित्य के गौरव का अनुभव नहीं है वह उन्नत नहीं हो सकता।" सीवी रमन जी ने भी कहा है कि "हमें विज्ञान की शिक्षा मातृभाषा में ही देनी चाहिए।अन्यथा विज्ञान एक ऊंचे स्तर की गतिविधि बनकर रह जाएगा। यह एक ऐसी गतिविधि नहीं होगी जिसमें सभी लोग भाग ले सकें।" हमें इस विषय में सोचने की भी आवश्यकता है। प्रत्येक भाषा एक धरोहर है और भाषा विविधता मानवता की सबसे बड़ी ताकत है।इसमें कोई संदेह नहीं है। एली विजेल ने कहा है कि "भाषा जीवित चीज हैं,वह बदलती हैं,वह बढ़ती हैं,वह मरती हैं।" इसलिए हमारी मातृभाषाओं का संरक...