कोई ऐसा कहे तो (koi aisa kahe to) story
कोई ऐसा कहे तो पतली सी छरहरी सी काया और भोलापन इतना कि सामने वाले की भी तोतली जुबान हो जाए ... किसी परिचय की मोहताज नहीं वह पर जिसे चाहती है , वह तो उसे शायद जानता भी नहीं कि वो भीतर से क्या है। फिर भी वह उसे ही चाहती है। क्यों चाहती है वह यह नहीं जानती पर उसमें कोई वासना नहीं है बस प्यार है जिसमें शरीर भी महत्वपूर्ण हो गया है। प्रेम के प्याले तो दो ही होते हैं। अरुणा एक रंगकर्मी है । नुक्कड़ नाटकों से होते हुए प्रेक्षागृह तक का सफर उसके लिए कभी भी आसान नहीं रहा ।पर, उसने उसे अपने अनुसार बनाने की कोशिश उसने जरूर की । वैसे तो वह एक अच्छी रंगकर्मी है। किंतु, जब भी वह उस शख्स को देखती है तो सब भूलने लगती है। ऐसा लगता है उसे कुछ आता ही नहीं। आज वह अगले मंचित होने वाले नाटक से पहले इतना अभ्यास कर लेना चाहती है कि उसे नाटक में सच्चाई और सच्चाई में भी नाटक महसूस करा सके। जैसी उसकी भावना होगी वह वैसी प्रतिक्रिया देगा। वह समझ गया तो सच्चाई नहीं समझा तो एक संवाद ही रह जाएगा। अपनी बचपन की दोस्त के पास खड़ी अरुणा सामने लगे आदमकद शीशे में अपनी छवि और आंखों में उसे ही देखती है।पहला ...