Artical (शिक्षा, संस्कृति और भारतीय परिवेश)
एक बात तो हम सभी मानते हैं कि भारतीय परिवेश में ज्ञान आदि स्रोत के रूप में वेदों को ही आधार बनाया जाता हैl भारतीय ज्ञान परंपरा में वेद ही ज्ञान का आरंभ माने जाते हैं l'शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ,नई दिल्ली सह अभ्यास वर्ग व कार्यशाला' ....यह लेख सिर्फ तटस्थ भाव से ही पढ़ें ....शिक्षा वह है जो हमें उचित -अनुचित का बोध कराती है l विपरीत परिस्थितियों के भंवर से बाहर निकालती है lकिंतु,शिक्षा का अर्थ संकुचन डिग्रियों तक ही होकर रह जाता हैl इस स्थिति में हमें आवश्यकता है ,शिक्षण उद्देश्य को समझते हुए समाज तक पहुंचनाl यह कार्य हम सभी का हैl जिसका दायित्व बोध हमें नहीं हो पाता l हम में से ही एक डॉक्टर दीनानाथ बत्रा जिन्हें इसका बोध हुआ और उन्होंने वर्ष 2004 में 'शिक्षा बचाओ आंदोलन' की शुरुआत कीl यह आंदोलन एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में गलत ढंग से किए गए बदलावों पर केंद्रित थाl किंतु,आज की स्थिति यह है कि इस आंदोलन का रूप बदलकर 'शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास' हो गया हैl जिसके संस्थापक के रूप में दीनानाथ बत्रा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैl अब इसके अभियान से जुड़े 11 विषय- च...