Love प्रेम(mohabbat) Hindi Poem
कहते हैं कि प्यार किसी दिन का मोहताज नहीं किसी लफ्ज़ , किसी शायरी की परवाह यहाँ नहीं दूरियाँ और नजदीकियां जहाँ कोई मायने रखती नहीं बस साँसों के साथ-साथ कोई आता जाता है किसी के दिए मान और अपमान से परे जहाँ किसी के दिए ज़ख्मों पर भी मुस्कुराना आ जाए किसी की एक आवाज़ भी जहाँ सुकून से भर दे किसी के दिए गए घाव भी जब असर न करे किसी एक की आहट जब हर तरफ़ से आए कुछ तो बात होगी उस इंसान मे और, उस इश्क़ करने वाले में भी जो अपना सबकुछ हार जाना चाहता हो सिर्फ एक को जीतने के लिए इतना प्यार होते हुए भी उसके बिना जीने के लिए खुद को तैयार करना सचमुच, साँस रोकने जैसा है अपने उस चाहत से जब नजरअंदाज कर दिए जाओ तो उसे भुलाना नहीं, उसे छोड़ना भी नहीं बस खुद को उससे दूर कर लेना यह आसान नहीं बहुत मुश्किल है पर, यही करना ही सही है गिड़गिड़ाते हुए उसके कदमों में झुकना क़बूल न करना रो लेना जी भरकर , उसकी हर एक बात उसका हर तिरस्कार तुम्हारी दिल को चीरता रहेगा...