कहना तो था ((story )
कहना तो था (story) मोहिनी सजती है, सँवरती है, पर अधूरी रह जाती है ।क्योंकि उसके होठों पर वह मुस्कान नजर नहीं आती जो उसके चेहरे को चमकते चांद का टुकड़ा बना देती है। उसने अपने पड़ोसी सुरेश को देखा और देखते ही उसकी तरफ बढ़ने लगी। बढ़ तो रही थे पर, ऐसा लग रहा था यह कदम आगे नहीं पीछे ही बढ़ रहे हों।मोहिनी ने आवाज दी,सुरेश! सुरेश तुम बहुत अच्छे हो।मैं तुमसे अपने दुर्व्यवहार के लिए माफी चाहती हूँ।मैंने तुम्हारे साथ कभी अच्छा नहीं किया। मेरे इतने "दुत्कारने के बाद भी तुम मेरे एक बार कहने पर मेरे पास आ जाते हो ,जी तो नहीं करता कि किसी से अपने दिल की बात कहूं पर न जाने क्यों आज मन बहुत बेचैन है। इतना बेचैन है ,कि कुछ सूझ नहीं रहा ।इस समय तुम्हारा ख्याल आया।एक तुम हो जो मेरे साथ खड़े हो जाते हो ।तुमसे कुछ कहना चाहती हूं ,वह कहना चाहती हूं जो मैं किसी और से नहीं कह सकती। मुझे पता है कि तुम मेरे बारे में अच्छा नहीं सोचोगे। फिर भी ,मैं तुमसे हर एक बात कहना चाहती हूं जो मुझ पर बीत रही है ।जिस पीड़ा को मैं भोग रही हूं ।मेरी हर बात सुनकर तुम शायद मुझसे नफरत करोगे। फिर भी ,मैं तुमसे कुछ कहना चाहती ...