Hindi story "Rishta"
कभी -कभी हमें कोई राह नहीं सूझती ...हम अपने बनाये रास्तों में खुद ही उलझ कर रह जाते हैं ।जिंदगी वह नहीं जिसे हम अपने हिसाब से अपनी जरुरतों को देखते हुए पूरा करना चाहते हैं ।यह किसी पेनड्राइव में सुरीले मनचाहे गाने भर लेने जैसा नहीं है, यहाँ तो जिन्दगी रेडियो की तरह बजती है ।जहाँ जो गाने बजे उसे सुनकर आनंदित होना होता है या फिर चैनल बदल लेना होता है...आप कोई भी चैनल चलाओ पर उसके तो प्रोग्राम फिक्स होते हैं।...कभी कभार ही आपका पसन्दीदा गाना बज सकता है हमेशा नहीं (जिंदगी के उतार चढ़ाव जैसे)मिताली की जिंदगी में अरमान की जो जगह है,वह उसकी रिक्तता में चाह कर भी नहीं भर पाती। क्योंकि उसने अरमान से उम्मीदों के पुल की चाह कर ली थी अपने नदी जैसे जीवन के लिए। ये उम्मीदें किसी को भी नहीं छोड़ती बहुत ही स्वार्थी हैं ये उम्मीदें कुछ न कुछ पाने की चाह रखती हैं,जिसके साथ हम जुड़ते हैं उनसे ये भी जुड़ जाती है किसी न किसी रूप में...पर ये जबतक रहती हैं तब तक तो कुछ नहीं बिगड़ता ....जब ये टूटती हैं न तो बहुत दर्द होता है.....तकलीफ भी होती है जैसे कोई दिल टूटा हो.....ऐसा दर्द जि...