यही सच है (This is the Truth)
यही सच है (This is the Truth) आज हम जिस दौर से गुजर रहे हैं वह बहुत ही गति से निकलता जा रहा है।हम सत्य से दूर होते जा रहे हैं। उस सत्य से जो हमारी आँखों के सामने रहता है फिर भी हम अनजाने बने रहते हैं। वह सच जो हमारे साथी की आँखों में, व्यवहार में दिखता है।फिर भी, हम उसे किसी अंधे की तरह देख नहीं पाते। या कहें कि देखना नहीं चाहते। यही दुख का सबसे बड़ा कारण है कि,उसे अपना इस कदर मान लेते हैं कि, उसपर किसी की नजर तक बर्दाश्त नहीं कर पाते और यही सोचते रहते हैं कि हमारा साथी भी हमारी तरह ही हमें चाहता होगा। यही हमारी सबसे बड़ी भूल होती है जिसे हम स्वीकार नहीं कर पाते और पीड़ा में डूबते जाते हैं। फिर स्थितियाँ बद से बदतर होनी शुरू हो जाती हैं।फिर,क्रोध और अपमान का सिलसिला शुरू हो जाता है और यह क्रोध जब आता है तब ही सच सामने आता है। छोड़ना तो हम जानते ही नहीं। हमने सीखा ही नहीं छोड़ना। हमने सीखा है कुछ भी हो पकड़ कर रखना। हम सच तो जान ही नहीं पाते समझ ही नहीं पाते।सच यही है।जो क्रोध में अपनी मर्यादा भूल जाए वह प्रेम नहीं कर सकता। जो प्रेम करता है वह हर स्थिति में, हर हाल में अपनी मर्यादा कभी ...