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Showing posts from July, 2025

यही सच है (This is the Truth)

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  यही सच है (This is the Truth) आज हम जिस दौर से गुजर रहे हैं वह बहुत ही गति से निकलता जा रहा है।हम सत्य से दूर होते जा रहे हैं। उस सत्य से जो हमारी आँखों के सामने रहता है फिर भी हम अनजाने बने रहते हैं। वह सच जो हमारे साथी की आँखों में, व्यवहार में दिखता है।फिर भी, हम उसे किसी अंधे की तरह देख नहीं पाते। या कहें कि देखना नहीं चाहते। यही दुख का सबसे बड़ा कारण है कि,उसे अपना इस कदर मान लेते हैं कि, उसपर किसी की नजर तक बर्दाश्त नहीं कर पाते और यही सोचते रहते हैं कि हमारा साथी भी हमारी तरह ही हमें चाहता होगा। यही हमारी सबसे बड़ी भूल होती है जिसे हम स्वीकार नहीं कर पाते और पीड़ा में डूबते जाते हैं। फिर स्थितियाँ बद से बदतर होनी शुरू हो जाती हैं।फिर,क्रोध और अपमान का सिलसिला शुरू हो जाता है और यह क्रोध जब आता है तब ही सच सामने आता है। छोड़ना तो हम जानते ही नहीं। हमने सीखा ही नहीं छोड़ना। हमने सीखा है कुछ भी हो पकड़ कर रखना। हम सच तो जान ही नहीं पाते समझ ही नहीं पाते।सच यही है।जो क्रोध में अपनी मर्यादा भूल जाए वह प्रेम नहीं कर सकता। जो प्रेम करता है वह हर स्थिति में, हर हाल में अपनी मर्यादा कभी ...

Nothing Special...सिर पैर की कुछ बातें

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 "Nothing Special...सिर पैर की कुछ बातें" आप किसी के खास हों इसमें क्या बात है, बात तो तब बने जब आप किसी खास के भी खास हों वक्त के पैरों में पंख होते हैं  समय ही है जिससे एक सा रहने की उम्मीद नही कर सकते। बनावटी इंसान बोलते बहुत हैं।बनावटी लोग तेज बोलकर सच को दबाना चाहते हैं विश्वास तब तक अटूट रहता है जबतक कोई उसे तोड़ने की कोशिश नहीं करता रंग उछाल दिया आसमान में और आसमान ने उसे खुद पर सजा लिया वो अजनबी इंसान इतना खास किसी के लिए कैसे हो जाता है,जिसके लिए अपने आप को धोखा देने के लिए भी दिल तैयार हो जाता है। व्यस्त समय का बहाना बहुत हुआ जनाब ,जब हम पहली बार मिले थे तब भी आप बहुत व्यस्त थे जब कोई आपसे बात करने के लिए बेचैन हो तो उसे कभी भी दुत्कारना नही चाहिए ऐसा जो करता है उसे बदले में दुत्कार जरूर मिलती है ... कभी गौर किया कि ये आंखों के काजल बह कैसे जाते हैं कभी गौर किया कि ये आंखों के काजल बह कैसे जाते हैं किसी की बातों को इतना भी दिल से लगाकर नही रखना चाहिए कि दिल में कुछ और रखने की जगह ही न बचे जब हमारे पास जबान है ,होठ है ,जीभ है ,वाणी के स्वर के हर साधन होते हुए भी जब हम...

"भारतीय ज्ञान परंपरा"और "राष्ट्रीय शिक्षा नीति,2020"

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     भारतीय ज्ञान परंपरा"और "राष्ट्रीय शिक्षा नीति,2020"( Bhartiy Gyan Parampra" Aur "Rashtriy Shiksha Niti 2020") शिक्षा व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करती है ।उसे पूर्ण मानव बनती है इसे बनाने के लिए कुछ मूलभूत आवश्यकताएं हैं।जिन्हें नई शिक्षा नीति 2020 के परिचय में भी देख सकते हैं । जहां पूर्ण मानव की बात कही जा रही है।यह पूर्ण मानव क्या है?यह कैसे बनता है?इसकी आवश्यकता क्यों है?और यह हमारे भारतीय ज्ञान परंपरा का अंग और अनिवार्य तत्व के रूप में क्यों है ?हमारी शिक्षा नीति  शिक्षा को पूर्ण मानव क्षमता को प्राप्त करने एक न्याय संगत और न्याय पूर्ण समाज के विकास और राष्ट्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए मूलभूत आवश्यकता है।यह शिक्षा जो कि मानव की एक मूलभूत आवश्यकता को बताती है।यह भारतीय ज्ञान परंपरा में किस प्रकार विद्यमान है ,और किस प्रकार यह मानव  को आलोकित करती है।हमारी हमारी प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपराएं और हमारी संस्कृति संसार में मानवता को प्रोत्साहित करती आ रही हैं।समृद्ध करती चली आ रही है।इसी भारतीय संस्कृति को 'आर्ष' शब्द से भी पुकारते हैं ।...